Thursday, December 7, 2017

PM मोदी ने तोड़े सेना गोला-बारूद खरीद के 6 साल के रिकॉर्ड : RTI खुलासा l


 

 

News Summary सुरक्षित हैं हम : मोदी सरकार ने इस साल तोड़ दिए हैं सेना के गोला बारूद की खरीद के पिछले 6 साल के सारे रिकॉर्ड - संसद में पेश कैग रिपोर्ट से भारतीय सेना के पास गोला बारूद की कमी के खुलासे के बाद जागी केंद्र सरकार का सराहनीय कदम : एक्टिविस्ट संजय शर्मा  की आरटीआई से हुआ खुलासा l 


Get complete details & original RTI at http://upcpri.blogspot.in/2017/12/6-l.html


लखनऊ/07 दिसम्बर 2017

News Author - Urvashi Sharma ( Freelance Journalist )

YAISHWARYAJ News Exclusive ©yaishwaryaj



बीते जुलाई महीने में भारत की संसद में पेश हुई नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) की एक रिपोर्ट ने यकायक पूरे भारतवर्ष को चिंता में दाल दिया था l इस रिपोर्ट के सार्वजनिक होने पर भारत सरकार के साथ-साथ देश के हर नागरिक का चिंतित होना स्वाभाविक ही था क्योंकि मामला चीन और पाकिस्तान सीमा पर आये दिन सैन्य कार्यवाहियां करती देश की बहादुर सेना के पास गोला-बारूद की भारी कमी होने की बात कैग की इस रिपोर्ट में साफ तौर पर कही गई थी l कैग द्वारा इस साल जनवरी में सेना के गोला-बारूद प्रबंधन का विश्लेषण करने के बाद डी गई इस रिपोर्ट में तोपखाने और टैंकों के लिए गोला-बारूद,मिसाइल और दूसरे विस्फोटकों में इस्तेमाल होने वाले  इलेक्ट्रॉनिक फ्यूज़ आदि की गंभीर रूप से किल्लत होने की बातें भी कहीं गईं थीं l साफ-साफ कहें तो इस रिपोर्ट में आंकलन किया गया था कि अगर भारतीय सेना को 10 दिनों तक लगातार युद्ध करना पड़ता तो उसके पास पर्याप्त मात्रा में गोला-बारूद उपलब्ध नहीं था lरिपोर्ट में बताया गया था कि किसी ऑपरेशन की अवधि की जरूरतों के हिसाब से रक्षा मंत्रालय द्वारा निर्धारित 40 दिन की अवधि का “वॉर वेस्टेज रिज़र्वरखा जाना और साल 1999 में भारतीय सेना द्वारा तय किया गया कम से कम 20 दिन का गोला-बारूद रिज़र्व होना आवश्यक था पर सितंबर 2016 में पाया गया था कि लगभग 55% प्रकार के गोला-बारूद की उपलब्धता MARL (Minimum Acceptable Risk Level) से कम थी यानि कि इन प्रकारों के गोला-बारूद की उपलब्धता न्यूनतम अपरिहार्य आवश्यकता परिचालन की ज़रूरत के हिसाब से नहीं था  l  इसके अलावा CAG ने 40%  प्रकार के गोला-बारूद की गंभीर रूप से कमी भी पाई थी जिनका तकरीबन 10 दिन का ही स्टॉक था l



पर अब देश और इसके नागरिकों को चिंतित होने की कोई आवश्यकता नहीं है l आबादी के हिसाब से देश के सबसे बड़े सूबे यूपी की राजधानी लखनऊ के फायरब्रांड एक्टिविस्ट और इंजिनियर संजय शर्मा की एक आरटीआई पर भारत के सेना मुख्यालय के जबाब से यह राहत भरा खुलासा हुआ है कि  नरेंद्र मोदी की अगुआई में चल रही केंद्र सरकार ने इस साल सेना के हथियार और गोला-बारूद की खरीद के मामले में पिछले 6 साल के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं l




एक्टिविस्ट संजय शर्मा द्वारा बीते 04 सितम्बर को भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय में दायर की गई आरटीआई पर एकीकृत मुख्यालय  रक्षा मंत्रालय ( सेना ) के लेफ्टिनेंट कर्नल और जन सूचना अधिकारी ए. डी. एस. जसरोटिया ने बीते 13 नवम्बर के पत्र के माध्यम से संजय को बताया है कि Arms & Ammunitions की खरीद पर जहाँ एक तरफ भारतीय सेना नें वित्तीय वर्ष 2011-12 में 25.85 Cr. रुपये, वित्तीय वर्ष 2012-13 में 4,051.35 Cr. रुपये, वित्तीय वर्ष 2013-14 में 10,394.37 Cr. रुपये,वित्तीय वर्ष 2014-15 में 3,802.41 Cr. रुपये, वित्तीय वर्ष 2015-16 में 3,427.97 Cr. रुपये,वित्तीय वर्ष 2016-17 में 11,348.92 Cr. रुपये ही खर्चे थे तो वहीं दूसरी तरफ हालिया वित्तीय वर्ष 2017-18 के शुरुआती 7 महीनों में  भारत सरकार 31 अक्टूबर तक  ही 28,303.43 Cr. रुपये खर्च कर चुकी है l 




पेशे से इंजीनियर संजय शर्मा बताते हैं कि इस सूचना से स्पष्ट है कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल के अंतिम तीन वर्षों में भारतीय सेना ने Arms & Ammunitions की खरीद पर 14471.57 Cr. रुपये खर्चे थे तो वहीं वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल के आरंभिक तीन वर्षों में भारतीय सेना ने Arms & Ammunitions की खरीद पर 18579.3 Cr. रुपये खर्चे   हैं जो पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल के खर्चे के मुकाबले 4107.53 Cr. रुपये अधिक है l 



देश के चोटी के आरटीआई विशेषज्ञों में शुमार होने वाले संजय शर्मा ने बताया कि हालांकि बीजेपी सरकार ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के मुकाबले 3 साल में सेना के आर्म्स एंड एम्मुनिशन पर अधिक खर्चा किया पर यह भी काफी कम था जिसका खुलासा CAG की रिपोर्ट में हुआ l संसद में पेश कैग रिपोर्ट से भारतीय सेना के पास गोला बारूद की कमी के खुलासे के बाद जागी केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा हालिया वित्तीय वर्ष 2017-18 के शुरुआती 7 महीनों में 31 अक्टूबर तक  ही 28,303.43 Cr. रुपये खर्च करने के कदम को सही बताते हुए एक्टिविस्ट संजय शर्मा  ने नरेंद्र मोदी पत्र लिखकर देश की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर लगातार सतर्क दृष्टि रखने की अपेक्षा करने की बात एक विशेष बातचीत में इस स्वतंत्र पत्रकार को बताई है l 


Tuesday, December 5, 2017

UP : RTI एक्टिविस्ट उर्वशी शर्मा को CIC वार्षिक सम्मेलन में शिरकत का निमंत्रण l





लखनऊ/05-12-2017................
देश की राजधानी नई दिल्ली स्थित केन्द्रीय सूचना आयोग आने वाले कल नई दिल्ली के विज्ञान भवन में  अपने 12वाँ वार्षिक सम्मेलन का आयोजन करने जा रहा  है l कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भारत के उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू कल प्रातः 11 बजे कार्यक्रम का उद्घाटन करेंगे l भारत सरकार के प्रधानमंत्री कार्यालय तथा कार्मिक लोक शिकायत एवं पेंशन राज्यमंत्री जितेन्द्र सिंह कार्यक्रम में सम्मानित अतिथि के रूप में शामिल होंगे l  केन्द्रीय मुख्य सूचना आयुक्त राधा कृष्ण माथुर कार्यक्रम में स्वागत भाषण देंगे और सूचना आयुक्त यशोवर्धन आज़ाद धन्यवाद ज्ञापन करेंगे l राजधानी लखनऊ निवासी और देश के नामचीन आरटीआई कार्यकर्ताओं में शुमार होने वाली उर्वशी शर्मा को भी इस कार्यक्रम में शिरकत करने के लिए केन्द्रीय सूचना आयोग की ओर से स्पीड पोस्ट द्वारा विशेष निमंत्रण पत्र भेजा है l



RTI एक्टिविस्ट उर्वशी शर्मा ने बताया कि साल 2005 में लागू हुआ सूचना का अधिकार अधिनियम 12 वर्ष पूरे कर चुका है l बकौल उर्वशी केन्द्रीय सूचना आयोग प्रत्येक वर्ष एक वार्षिक सम्मेलन का आयोजन करता है जिसमें देश भर के सभी राज्यों के सूचना आयुक्तों और प्रमुख आरटीआई एक्टिविस्टों को कार्यक्रम में आमंत्रित किया जाता है l उर्वशी ने बताया कि वे खुश हैं कि केन्द्रीय सूचना आयोग ने उनको इस कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया है l



बताते चलें कि एक्टिविस्ट उर्वशी शर्मा बिना कोई सरकारी मदद लिए ‘येश्वर्याज’ के नाम से एक एनजीओ चलाती हैं जो हर साल आरटीआई के क्षेत्र में अच्छा काम करने वाले एक्टिविस्टों को सम्मानित करके उनकी हौसला आफजाई करता है l उत्तर प्रदेश के राज्य सूचना आयोग की अनियमितताओं  पर आयोग और आयुक्तों को प्रायः घेरने वाली एक्टिविस्ट उर्वशी ने बताया कि मौका मिलने पर वे कल के सम्मलेन में यूपी सूचना आयोग की खामियों को उजागर करेंगी l



बकौल उर्वशी दिल्ली में होने वाले इस कार्यक्रम में ‘स्वतः प्रकटन’, ‘अभिलेखों का रख-रखाव’ और ‘आर.टी.आई. अधिनियम 2005 के क्रियान्वयन में उभरते मुद्दे’ विषयों पर वार्ता के तीन अलग-अलग सत्र भी होंगे l उर्वशी को इन तीनों सत्रों के लिए भी निमंत्रित किया गया है l



उर्वशी शर्मा ने एक विशेष बातचीत में बताया कि वे शीघ्र ही उत्तर प्रदेश के मुख्य सूचना आयुक्त जावेद उस्मानी से मिलकर यूपी में भी केंद्र की तर्ज पर राज्य सूचना आयोग का वार्षिक सम्मलेन आयोजित करने की मांग करेंगी l








     

Thursday, November 23, 2017

OMG! गुलामी के प्रतीक 'ब्रिटिश क्राउन' को आजाद भारत के 'राष्ट्रीय चिन्ह' से पूरी तरह बदलने में लगा दिए 25 साल l समान दर्जा प्राप्त हैं 'जन गण मन' और 'वंदे मातरम' l - आरटीआई गर्ल ऐश्वर्या पाराशर की आरटीआई ने किया खुलासा l


लखनऊ/23 नवंबर 2017
हम सभी जानते हैं कि भारत 15 अगस्त 1947 को आजाद हुआ और 26 जनवरी 1950 को हमारा संविधान लागू किया गया l भारत की आजादी से पहले सभी सरकारी कामकाजों में ब्रिटिश क्राउन का इस्तेमाल राष्ट्रीय चिन्ह के रूप में किया जाता था l ठीक उसी तरह जिस तरह आज हर सरकारी कामकाज में आजाद भारत के राष्ट्रीय चिन्ह सत्यमेव जयते लिखी हुई अशोक की लाट का प्रयोग किया जाता है जिसे भारत का राज्य  संप्रतीक कहा जाता है पर यदि आपको बताया जाए  कि असंख्य बलिदानों के बाद पाई गई आजादी के बाद भी गुलामी के प्रतीक ब्रिटिश क्राउन को भारत के वर्तमान राष्ट्रीय चिन्ह से पूरी तरह से प्रतिस्थापित करने के लिए भारत सरकार ने 25 साल लगा दिए थे तो क्या आप इस पर यकीन करेंगे ? शायद नहीं पर अब यूपी की राजधानी लखनऊ के सिटी मोंटेसरी स्कूल की राजाजीपुरम शाखा की कक्षा 11 की  15 वर्षीय छात्रा और देशभर में आरटीआई गर्ल के नाम से जानी जाने वाली ऐश्वर्या पाराशर की एक आरटीआई अर्जी पर भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा दिए गए जवाब के बाद आपको इस कड़वी सच्चाई पर यकीन करना ही पड़ेगा l 

To download original RTI & its reply, please click this weblink

आरटीआई गर्ल ऐश्वर्या पाराशर ने बीते 4 अगस्त को भारत सरकार के गृह मंत्रालय में एक आरटीआई दायर करके  भारत के राष्ट्रीय प्रतीक को घोषित करने की फाइल के रिकॉर्ड की नोटशीट सहित सत्यापित कॉपियां मांगी थीऐश्वर्या की आरटीआई  के जवाब में गृह मंत्रालय के  पब्लिक अनुभाग के उपसचिव स्थापना एवं केंद्रीय जन सूचना अधिकारी वी के राजन ने ऐश्वर्या को पत्र लिखकर बताया है कि आजाद भारत के राज्य संप्रतीक को वर्ष 1947 में अंगीकृत किया गया था और इसके पश्चात आदर्श वाक्य सत्यमेव जयते को वर्ष 1947 में भारत के राज्य संप्रतीक  के एक अभिन्न भाग के रूप में समाहित किया गया था l राजन ने ऐश्वर्या को यह भी बताया है क़ि  क्राउन को एक प्रेस विज्ञप्ति के जरिए 26 जनवरी 1950 को भारत के राज्य संप्रतीक के रूप में प्रतिस्थापित किया गया था l

भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने ऐश्वर्या को प्रेस इनफार्मेशन ब्यूरो  की 7 नवंबर 1950 को जारी की गई प्रेस विज्ञप्ति और भारत को अंग्रेजों से आजादी मिलने के 25  साल बाद  28 अक्टूबर 1972 को जारी किये गए एक आदेश की छायाप्रति देते हुए बताया है कि  भारत सरकार ने आजादी के बाद 12 अक्टूबर 1949 को तत्कालीन प्रदेश सरकारों को गुलामी के प्रतीक ब्रिटिश क्राउन को तत्काल भारत के राष्ट्रीय प्रतीक से बदलने के स्थान पर धीरे धीरे बिना किसी प्रचार के बदलने की  एडवाइजरी जारी की थी l

अपने विद्यालय में जिज्ञासु  प्रश्न उठाने के लिए चर्चित तेज तर्रार ऐश्वर्या सवाल उठाती हैं कि आखिर क्या कारण था कि  गुलामी के प्रतीक ब्रिटिश क्राउन को पूरी तरह हटाने के लिए भारत सरकार ने पूरे 25 साल लगा दिए और आजादी की 25 वीं वर्षगांठ तक दासता के प्रतीकों को पूरी तरह हटाने के लिए भारत सरकार ने अपना यह आदेश 28 अक्टूबर 1972 को जारी किया था l

ऐश्वर्या की इसी आरटीआई के जवाब में यह भी बताया गया है की जन गण मन को भारत के राष्ट्रगान के रूप में भारत की संविधान निर्मात्री सभा द्वारा 24 जनवरी 1950 को अंगीकृत किया गया था और इसके साथ ही वंदे मातरम गीत को भी समान दर्जा प्रदान किया गया था और इससे संबंधित संविधान सभा की बैठक के मिनट्स के एक पेज की कॉपी भी ऐश्वर्या को दी है l


ऐश्वर्या कहती हैं कि अब वे  वह कारण भी जानना चाहेंगी  जिनकी वजह से भारत सरकार ने आजादी के बाद भी गुलामी के प्रतीकों को तत्काल हटाने के संबंध में कोई स्पष्ट सरकारी आदेश जारी नहीं किया और ब्रिटिश क्राउन की जगह भारत के राष्ट्रीय प्रतीक को बदलने के लिए 7 नवंबर 1950 को प्रेस इनफार्मेशन ब्यूरो से  मात्र एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कराई थी l  

Tuesday, November 7, 2017

भारत का कोई राष्ट्रीय फूल नहीं l भारत सरकार की वेबसाइट पर प्रदर्शित है झूंठी सूचना ! ‘आरटीआई गर्ल’ ऐश्वर्या पाराशर की आरटीआई से हुआ खुलासा l



लखनऊ/ 7 नवंबर 2017

भारत सरकार की वेबसाइट पर राष्ट्रीय पुष्प कमल को बताया जा रहा है l पूरा भारत कमल को राष्ट्रीय पुष्प मानता  है l सामान्य ज्ञान की सभी किताबों में राष्ट्रीय पुष्प से संबंधित सबालों के सभी जबाब कमल पर जाकर खत्म होते हैं l देश-विदेश में सभी यही मानते हैं कि कमल भारत का राष्ट्रीय फूल है लेकिन  यूपी की राजधानी लखनऊ के सिटी मांटेसरी स्कूल की राजाजीपुरम शाखा की कक्षा 11 की जीव विज्ञान की छात्रा और देशभर में आरटीआई गर्ल के नाम से जानी जाने वाली 15 वर्षीय ऐश्वर्या पाराशर द्वारा अपनी जिज्ञासा शांत करने के लिए डाली गई एक आरटीआई अर्जी पर भारत सरकार के पर्यावरण एवं वन मंत्रालय के अधीन कार्यरत संस्था भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण के निदेशक के कार्यालय के जूनियर एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर और केंद्रीय जन सूचना अधिकारी तापस कुमार घोष द्वारा बीते 2 नवंबर को ऐश्वर्या को दिए गए उत्तर से राष्ट्रीय पुष्प के संबंध में भारत सरकार की वेबसाइट पर प्रदर्शित सूचना झूंठी साबित हो रही है l भारत सरकार की वेबसाइट पर राष्ट्रीय पुष्प कमल को बताया जा रहा है जबकि इस आरटीआई उत्तर से सालों साल से चला आ रहा भ्रम दूर हो गया है और यह स्पष्ट हो गया है कि भारत का कोई भी आधिकारिक राष्ट्रीय फूल  नहीं है  l

To download original RTI & other related evidences, please click this weblink http://upcpri.blogspot.in/2017/11/l-l.html


महज 8 साल की उम्र में आरटीआई  का प्रयोग कर  अपने स्कूल के सामने  से कूड़ाघर  हटवाकर  पब्लिक लाइब्रेरी  बनवाने जैसा  बड़ा काम  करने  की वजह से  देशभर में  आरटीआई गर्ल के नाम से मशहूर हुई  और  केंद्रीय सूचना आयोग की  कॉफी टेबल बुक में  देश के गिने चुने  आरटीआई कार्यकर्ताओं के बीच  अपनी जगह बना चुकी  ऐश्वर्या  बताती हैं  कि उन्होंने  राष्ट्रीय पुष्प के रूप में  कमल के जाने जाने की  पुष्टि करने के लिए  यह  आरटीआई  बीते 17 अगस्त को  डाली थी  जिसके जवाब में  अब उन्हें बताया गया है  की  भारत का कोई राष्ट्रीय फूल नहीं है l 


ऐश्वर्या ने बताया  कि अब वे  अपने प्रधानपंत्री  अंकल को  पत्र लिखकर अनुरोध करेंगी कि वे या तो कमल को  राष्ट्रीय पुष्प घोषित करने का आधिकारिक आदेश जारी करा दें  या भारत सरकार की वेबसाइट पर राष्ट्रीय पुष्प के रूप में कमल को दिखाने वाली सूचना को  तत्काल हटवाकर मिनिस्ट्री ऑफ एचआरडी को निर्देशित कर  राष्ट्रीय पुष्प के संबंध में चले आ रहे हैं  भ्रम को दूर करने के लिए  शासनादेश जारी कर  सामान्य ज्ञान  में लंबे समय से चली आ रही त्रुटि को  संशोधित किया जाए l

Saturday, November 4, 2017

UP: एक्टिविस्ट उर्वशी शर्मा ने सूचना आयोग पर लगाया पुलिस के साथ साजिश कर RTI आवेदक के खिलाफ अवैध FIR लिखाने का आरोप l



लखनऊ / 04 नवंबर 2017…………………..

 आबादी के हिसाब से भारत के सबसे बड़े सूबे यानि कि उत्तर प्रदेश की तेजतर्रार एक्टिविस्ट उर्वशी शर्मा ने राज्य के सूचना आयोग और पुलिस विभाग पर  साजिश करके एक  RTI आवेदक के खिलाफ अवैध FIR लिखाने का गंभीर आरोप लगाया है l उर्वशी ने यह आरोप लखनऊ स्थित सामाजिक संगठन येश्वर्याज की आज की बैठक के बाद लगाया है और जल्द ही इस मामले में येश्वर्याज के प्रतिनिधिमंडल के साथ यूपी के राज्यपाल से मिलकर सूचना आयोग द्वारा RTI आवेदकों के खिलाफ इस तरह की साजिश करने के प्रमाण राज्यपाल को सौंपकर राज्यपाल  द्वारा इस तरह के आरटीआई आवेदकों के उत्पीड़न के गंभीर मामलों  का संज्ञान लेकर आरटीआई एक्ट की धारा 17 के तहत कड़ी कार्यवाही करने की मांग करने की बात कही है l


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येश्वर्याज की संस्थापिका उर्वशी शर्मा ने सभा की अध्यक्षता करते हुए इस चौंकाने वाले समाचार का खुलासा किया है जिसके अनुसार पुलिस विभाग में आरटीआई डालकर अपनी अर्जी पर की गई कार्यवाही पर सूचना मांगना एक RTI  आवेदक को इतना भारी पड़ा है कि  सूचना आयोग के के इशारे पर पुलिस ने  खुद पहल करते हुए  अपने एक  सब इंस्पेक्टर  से तहरीर लेकर  आरटीआई  आवेदक के खिलाफ IPC की धारा 353 और 504 में FIR दर्ज कर ली है और 2 साल से काम सजा के अपराध होने पर भी लगातार आरटीआई आवेदक के घर पर दबिश डालकर उसका मानसिक उत्पीड़न किया जा रहा है l



बकौल उर्वशी मामला दरअसल यूं है कि RTI  आवेदक लखनऊ निवासी तनवीर अहमद सिद्दीकी ने साल 2016 में, जब सूचना आयोग इंदिरा भवन में हुआ करता था, सूचना आयोग के एक आयुक्त पर अपने निजी स्टाफ के साथ मिलकर मारपीट और गाली गलौज करने का आरोप लगाया था और इस संबंध में एक अर्जी यूपी के पुलिस महानिदेशक को भी भेजी थी l  उर्वशी ने बताया कि बाद में तनवीर ने पुलिस महानिदेशक को भेजी इस अर्जी पर पुलिस विभाग द्वारा की गई कार्यवाही की सूचना मांगी और पुलिस विभाग द्वारा सही सूचना ना दिए जाने पर आयोग में इस मामले की शिकायत सूचना आयोग में दर्ज कराई l आवेदक  की इस आरटीआई अर्जी पर सूचना देने के स्थान पर सब इंस्पेक्टर प्रमोद कुमार यादव ने बीते महीने की 30 तारीख को आयोग जाकर आरोपी सूचना आयुक्त के निजी स्टाफ के बयान लिए और पीड़ित तनवीर के खिलाफ ही मुकदमा दर्ज करने की तहरीर  हजरतगंज थाने में दे दी और 30 तारीख को ही हजरतगंज थाने में तनवीर के खिलाफ मुकदमा कायम भी हो गया l


आरटीआई  एक्ट  एक्ट की धारा 21 का हवाला देते हुए देश के प्रख्तात आरटीआई एक्टिविस्टों में शुमार उर्वशी शर्मा ने आरोप लगाया है कि  सूचना आयोग ने लखनऊ पुलिस के साथ पेशबंदी में यह झूंठी FIR लिखाई है l उर्वशी बताते हैं कि  आरटीआई एक्ट की धारा 21 में यह प्राविधानित है कि  कोई वाद अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही किसी भी ऐसी बात के बारे में जो इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए किसी नियम के अधीन सद्भाव पूर्वक की गई है या किये जाने के लिए आशयित है, किसी व्यक्ति के विरुद्ध न  होगी l  बकौल उर्वशी इस FIR की तहरीर में यह स्पष्ट लिखा है की आवेदक तनवीर के खिलाफ यह FIR उनके  द्वारा साल 2016 में सूचना आयोग में दर्ज कराई गई शिकायत संख्या एस 3 190 सी/2016 की सूचना देने के क्रम में  दर्ज कराई गई है और  पुलिस की इस कार्यवाही को आरटीआई एक्ट की धारा 21 के प्रतिकूल होने के आधार पर अवैध बताया है और इस FIR को
निरस्त कराने की मांग उठा दी  है l


बकौल उर्वशी पीड़ित  के विरुद्ध साल 2016 की 11 जनवरी को  घटित जिस घटना के आधार पर पीड़ित  के खिलाफ 1 साल 9 महीने से ज्यादा का समय हो जाने के बाद यह FIR दर्ज कराई गई है, उस मामले में तनवीर अहमद सिद्दीकी पुलिस थाने,SSP, डीजीपी,शासन-प्रशासन ,सूचना आयोग, मानव अधिकार आयोग आदि को अर्जियां  देने के बाद लखनऊ के सीजेएम न्यायालय में  परिवाद दायर कर चुके हैं और सूचना आयुक्त के साथ साथ उनके स्टाफ के खिलाफ तनवीर की रिवीजन पिटीशन लखनऊ के जिला जज के न्यायालय में सुनवाई पर लगी हुई है और इन दो आधार पर उर्वशी ने तनवीर के खिलाफ लिखाई गई FIR को सूचना आयोग द्वारा पेशबंदी में किया गया एक निंदनीय कार्य बताते हुए सूचना आयोग की इस साजिश की सार्वजनिक भर्त्सना भी की है l



देश के नामचीन एक्टिविस्टों में से एक समाजसेविका उर्वशी प्रश्न करती हैं कि यदि तनवीर के खिलाफ कोई ऐसा अपराध सूचना आयुक्त की उपस्थिति में किया गया था तो सूचना आयोग ने जनवरी 16 से अब तक पौने 2 साल से अधिक का समय हो जाने पर भी इस मामले में विधिक कार्यवाही के लिए कोई कदम क्यों नहीं उठाया और आखिर क्यों जब आरोपी सूचना आयुक्त को लखनऊ के जिला जज न्यायालय में अपना अधिवक्ता खड़ा करना पड़ा तब आरटीआई एक्ट  की धारा 21 को धता बता कर सूचना आयोग में प्रचलित शिकायत के आरटीआई आवेदन की विषय वस्तु के आधार पर  यह झूंठी FIR दर्ज कराई है जो एक्ट के अनुसार भी अवैध है l इस मामले में सूचना आयोग की गहरी साजिश का जिक्र करते हुए उर्वशी बताती हैं कि अमूमन पुलिस महानिदेशक कार्यालय से संबंधित सभी मामले मुख्य सूचना आयुक्त जावेद उस्मानी द्वारा सुने जाते  हैं लेकिन इस मामले को साजिशन उसी आयुक्त के यहां पंजीकृत किया गया जिसके खिलाफ तनवीर अहमद सिद्दीकी ने आपराधिक आरोप लगाए थे और इस आधार पर मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयोग के रजिस्ट्रार को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है l

उर्वशी ने बताया कि वे देश विदेश के शीर्ष आरटीआई कार्यकर्ताओं से संपर्क कर रही हैं और जल्द ही इस मामले में एक देशव्यापी मुहिम चलकर तनवीर जैसे पीड़ितों को न्याय दिलाने के साथ-साथ सूचना आयोगों के चेहरों पर चढ़े झूंठ और फरेब के मुखौटों को नोंच फेंका जाएगा l 


Friday, October 13, 2017

'एक्टिविस्ट्स को 'RTI रत्न' 2016 से सम्मानित कर NGO येश्वर्याज' ने लखनऊ के यूपी प्रेस क्लब में मनाया 'RTI डे 2017'




लखनऊ/13 अक्टूबर 2017..........

साल 2005 में लागू हुए सूचना का अधिकार कानून के 12 साल पूरे होने के मौके पर यूपी की राजधानी लखनऊ स्थित सामाजिक संगठन 'येश्वर्याजने  12 अक्टूबर 2017 को यूपी के सुदूर जिलों अमेठी,उन्नाव,लखनऊ,फर्रुखाबाद,फतेहपुर,शाहजहांपुर,मऊ ,हरदोई,सुल्तानपुर,बाराबंकी और प्रतापगढ़ से आये सौ से अधिक आरटीआई कार्यकर्ताओं के साथ लखनऊ के यूपी प्रेस क्लब के खचाखच भरे हॉल में  आरटीआई कार्यकर्ताओं को 'आरटीआई रत्न' सम्मान दे  कर आरटीआई डे 2017  मनाया ।

कार्यक्रम की अध्यक्षता उच्च न्यायालय इलाहाबाद के सेवानिवृत्त न्यायाधीश कमलेश्वर नाथ ने की और नैतिक पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और विख्यात अधिवक्ता चंद्र भूषण पांडेय ने कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम में शिरकत की ।कार्यक्रम में डा. नीरज कुमार,आलोक चांटिया,नम्रता शुक्ला,पुष्पा अनिल,डा. महिमा देवी के साथ अनेकों अधिवक्ताओं ने भी शिरकत की

इस अवसर पर लखनऊ के आरटीआई कार्यकर्ता अशोक कुमार शुक्ल को 'येश्वर्याज आरटीआई रत्न 2016' प्रथम पुरस्कार;शाहजहांपुर के प्रकाश चंद्र पाठक को 'येश्वर्याज आरटीआई रत्न 2016' द्वितीय पुरस्कार;फर्रुखाबाद के शिव नारायण श्रीवास्तव और फतेहपुर के जय सिंह परिहार को सम्मिलित रूप से 'येश्वर्याज आरटीआई रत्न 2016' तृतीय पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया

कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के सतना जिले के राजीव खरे के साथ-साथ  लखनऊ के विनोद कुमार यादव; आनंद, गणेश यादव और उन्नाव की सरस्वती को मिलाकर 8  एक्टिविस्ट्स को आरटीआई एक्ट का सार्थक प्रयोग करने के लिए 'येश्वर्याज आरटीआई रत्न 2016' प्रोत्साहन पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया ।

कार्यक्रम की आयोजिका समाजसेविका उर्वशी शर्मा ने बताया कि उनका संस्थान प्रत्येक वर्ष सूचना के अधिकार अधिनियम का प्रयोग कर लोकजीवन में पारदर्शिता और जबाबदेही लाने के लिए सराहनीय कार्य करने वाले व्यक्तियों से प्राप्त आवेदनों के आधार पर 'आरटीआई रत्न' पुरस्कार देता है

कार्यक्रम में अगले वर्ष दिए जाने वाले 'येश्वर्याज आरटीआई रत्न पुरस्कार 2017 के फॉर्म का विमोचन कर इन पुरस्कारों का नामांकन की प्रक्रिया की शुरुआत की गई और कार्यक्रम के सभी प्रतिभागियों को नई दिल्ली की संस्था 'कामनवेल्थ ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव' (CHRI) द्वारा निःशुल्क उपलब्ध कराई गई RTI गाइड और येश्वर्याज की ओर से यूपी आरटीआई नियमावली 2015 की प्रतियों के निःशुल्क वितरण किया गया ।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि लखनऊ उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता चंद्र भूषण पांडेय ने आरटीआई एक्टिविस्टों के कार्यों की सराहना करते हुए आरटीआई सम्बन्धी सभी मामलों में निःशुल्क विधिक राय देने और आरटीआई एक्टिविस्ट्स के मामलों को संस्था येश्वर्याज के मार्फत निःशुल्क उच्च न्यायालय ले जाने की बात कही

अपने अध्यक्षीय भाषण में उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस कमलेश्वर नाथ ने येश्वर्याज के आयोजन को सार्थक बताते हुए आयोजिका उर्वशी शर्मा को बधाई दी और एक्टिविस्टों को सलाह दी कि वे सूचना आयुक्तों के गलत आदेशों को उनके खिलाफ अक्षमता का प्रमाण बनाकर राज्यपाल  से शिकायत करें ताकि इस प्रमाणों के आधार पर सही कार्य न करने वाले सूचना आयुक्तों को हटवाकर सूचना आयोग की कार्यप्रणाली में अपेक्षित सुधार हो सके ।कमलेश्वर नाथ ने  आरटीआई एक्ट को मजबूती देने से सम्बंधित मुद्दों को अपने स्तर से उठाने की बात भी कही ।


कार्यक्रम में बोलते हुए देश के प्रमुख आरटीआई एक्टिविस्ट उर्वशी  शर्मा ने आरटीआई एक्ट लागू होने के बाद 12  सालों में 70  से अधिक आरटीआई कार्यकर्ताओं की हत्या होने,500  से अधिक आरटीआई कार्यकर्ताओं का गंभीर उत्पीड़न होने, व्हिसिलब्लोअर कानून लागू न होने,सूचना आयुक्तों की नियुक्तियों में उच्चतम न्यायलय द्वारा नमित  शर्मा मामले में दी गई गाइडलाइन्स का सरकारों द्वारा अनुपालन न करने और सरकारी विभागों द्वारा वेबसाइट्स पर एक्ट की धारा 4 (1 )(b ) की सूचना न डालने, सरकारों द्वारा जनता को प्रशिक्षित करने के लिए बजट न देने और सरकारी अफसरों में आरटीआई एक्ट का ज्ञान न होने पर चिंता व्यक्त करते हुए एक्टिविस्ट्स को इन एक रणनीति बनाकर मुद्दों पर कार्य करने के लिए प्रोत्साहित किया


कार्यक्रम के अंत में आयोजिका उर्वशी शर्मा ने अध्यक्ष, मुख्य अतिथि और यूपी के अमेठी,उन्नाव,लखनऊ,फर्रुखाबाद,फतेहपुर,शाहजहांपुर,मऊ ,हरदोई,सुल्तानपुर,बाराबंकी और प्रतापगढ़ से आये सैकड़ों एक्टिविस्ट्स को धन्यवाद ज्ञापित किया कार्यक्रम का सञ्चालन मानवाधिकार कार्यकर्ता और इंजीनियर संजय शर्मा ने किया


Tuesday, October 10, 2017

"RTI day 2017" celebrations by YAISHWARYAJ at Press Club Lucknow on 12 October 2017 From 12:00 Hrs. to 14:00 Hrs.



YAISHWARYAJ's RTI Ratn 2016 Award Ceremony, RTI activists' meet, RTI Awareness Camp, CHRI RTI Guide & UP RTI Rules 2015 distribution.